हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया कि जिस शख़्स ने भी अपने भाई (मुसलमान) को कहा ऐ काफ़िर (ओ काफ़िर) तो यह कुफ़्र उन दोनों में से एक पर लौटा (नस्र-उल-बारी/जि: 11)
एक लोमड़ (सियार) की दुम (पूंछ) पर पत्थर आ गिरा, और दुम कट गई।
एक दूसरे लोमड़ ने जब उसे देखा तो पूछा, "यह तुमने अपनी दुम क्यों काटी?"
दुम कटा लोमड़ बोला, "इससे बड़ी खुशी और फरहत (आनंद) महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे हवाओं में उड़ रहा हूँ। वाह!! क्या मनोरंजन है!"
बस घेर-घार कर (बहला-फुसलाकर) उ...