وَعَنْ رَجُلٍ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ﷺ قَالَ: ”إِذَا اجْتَمَعَ الدَّاعِيَانِ فَأَجِبْ أَقْرَبَهُمَا بَابًا وَإِنْ سَبَقَ أَحَدُهُمَا فَأَجِبِ الَّذِي سَبَقَ“ رَوَاهُ أَحْمَدُ وَأَبُو دَاوُدَ(مشکوٰۃ المصابیح : باب الوليمہ)
अनुवाद
हज़रत नबी करीम (ﷺ) के असहाब में से एक शख़्स से रिवायत है कि बिला शुबा हज़रत रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया कि जब दो दावत देने वाले जमा हो जाएं, तो उसकी दावत क़ुबूल करो जो उनमें से दरवाज़े के एतबार से ज़्यादा क़रीब है, और अगर उनमें से एक ने पहले दावत दी है, तो उसकी दावत क़ुबूल करो जिसने पहले दावत दी है। (अल-रफ़ीक़ अल-फ़सीह/जि: 16/पृ: 373)