قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : إِنَّ مِنْ أَكْبَرِ الْكَبَائِرِ أَنْ يَلْعَنَ الرَّجُلُ وَالِدَيْهِ قِيلَ ، يَا رَسُولَ اللَّهِ ، وَكَيْفَ يَلْعَنُ الرَّجُلُ وَالِدَيْهِ ؟ قَالَ : يَسُبُّ الرَّجُلُ أَبَا الرَّجُلِ فَيَسُبُّ أَبَاهُ وَيَسُبُّ أُمَّهُ فيَسُبُّ أُمَّه (کتاب: بُخاری شریف کتاب الادب حدیث نمبر: ۵۹۷۳)
अनुवाद
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "बड़े कबीरा गुनाहों में से यह बात है कि आदमी अपने माँ-बाप पर लानत भेजे।" सहाबा ने पूछा: "या रसूलल्लाह! कोई अपने माँ-बाप पर लानत कैसे भेज सकता है?" आपने फ़रमाया: "दूसरे आदमी के बाप को गाली दे, पस वह उसके बाप को गाली दे, और दूसरे की माँ को गाली दे, पस वह उसकी माँ को गाली दे। (इस तरह आदमी सबब बनकर अपने वालिदैन को गालियाँ दिलवाता है, पस गोया उसने ख़ुद अपने वालिदैन को गालियाँ दीं।)" (किताब: तोहफ़त-उल-क़ारी; जिल्द: ११; सफ़्हा: ५०)