हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से मरवी है कि आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: "मोमिन अपने हुस्न-ए-अख़लाक़ की वजह से उस शख़्स जैसा मर्तबा हासिल कर लेता है जो कि तमाम दिन रोज़ा रखे और रात को इबादत करे।" (सुनन अबू दाऊद मुतरजिम/जिल्द:३)
एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा, "बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे शौहर (पति) ने तुम्हें क्या तोहफ़ा दिया???"
सहेली ने कहा, "कुछ भी नहीं!!!!"
उसने सवाल करते हुए पूछा, "क्या यह अच्छी बात है??? क्या उनकी नज़र में तुम्हारी कोई क़ीमत नहीं???"
लफ़्ज़ों (शब्दों) का यह ज़हरीला बम गिराकर वह सहे...