عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَؓ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ : إِيَّاكُمْ وَالظَّنَّ فَإِنَّ الظَّنَّ أَكْذَبُ الْحَدِيثِ ، وَلَا تَحَسَّسُوا وَلَا تَجَسَّسُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَكُونُوا عِبَادَ اللَّهِ إِخْوَانًا(بُخاری شریف:۶۰۶۴)
अनुवाद
नबी (ﷺ) ने फ़रमाया: गुमान बाँधने से बचो, इसलिए कि गुमान सबसे बड़ा झूठ है! और टोह मत लगाओ (ख़बरें मालूम मत करो) और खोद-कुरेद मत करो (सुराग़ मत लगाओ) और बाहम दुश्मनी मत रखो (एक दूसरे से नफ़रत मत करो) और आपस में ताल्लुक़ ख़त्म मत करो (एक दूसरे के दुश्मन मत बन जाओ) और अल्लाह के बंदे भाई-भाई बनकर रहो (तुहफ़त-उल-क़ारी)।