हदीस अल-रसूल ﷺ

سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ زَيْدٍ قَالَ : سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ : الْكَمْأَةُ مِنَ الْمَنِّ وَمَاؤُهَا شِفَاءٌ لِلْعَيْنِ(بُخاری شریف: ۵۷۰۸)
अनुवाद
खुम्बी मन्न से है, और इसका पानी आँख के लिए मुफ़ीद है (तुहफ़त-उल-क़ारी)।
एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)
लेख

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़माने में पांच मर्तबा अज़ान देकर खुलेआम नमाज़ें पढ़ता था। यह सुनकर इस आजिज़ को हैरत हुई और पूछा: "वह कैसे?" उस नौजवान ने अपन...

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