हदीस अल-रसूल ﷺ

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: مَنْ دُعِيَ فَلَمْ يُجِبْ فَقَدْ عَصَى اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَمَن دَخَل٘ عَلى غَيْرِ دَعْوَةٍ دَخَلَ سَارِقًا وَخَرَجَ مُغِيرًا. رَوَاهُ أَبُو دَاوُد(مشکوۃ المصابیح:۳۲۲۲)
अनुवाद
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हज़रत रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: "कि जिस शख्स की दावत की जाए और वह क़ुबूल न करे तो उस शख्स ने अल्लाह और उसके रसूल की नाफ़रमानी की, और जो शख्स बिन बुलाए दावत में शरीक हुआ तो वह चोर की शक्ल में दाखिल हुआ और डाकू की सूरत में बाहर निकला।" (अबू दाऊद) (अर-रफ़ीक़ अल-फ़सीह / जिल्द: 16 / सफ़्हा: 372)
रोले अब दिल खोल कर :
लेख

रोले अब दिल खोल कर :

आह! कोई नहीं, सब गुमराह हो गए; सब निकम्मे निकले, सब गाफ़िल (लापरवाह) हो गए, सब पर मौत की नींद छा गई; सब ने एक ही तरह की हलाकत (विनाश) का घूंट पी लिया, सब एक ही तरह की तबाही पर टूट पड़े; सब ने ख़ुदा को छोड़ दिया, सब ने उसकी मोहब्बत से मुंह मोड़ लिया, सब ने उसके पवित्र रिश्ते को बट्टा लगा दिया (कलंकित...

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