हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي مُوسَى قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا أَحَدَ أَصْبَرُ عَلَى أَذًى يَسْمَعُهُ مِنْ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ إِنَّهُ يُشْرَكُ بِهِ وَيُجْعَلُ لَهُ الْوَلَدُ ثُمَّ هُوَ يُعَافِيهِمْ وَيَرْزُقُهُمْ(مسلم شریف:۲۸۰۴)
अनुवाद
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: "कोई भी अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से बढ़कर तकलीफ़ों पर सब्र करने वाला नहीं है कि उसके साथ शरीक किया जाता है और उसके लिए औलाद साबित की जाती है, फिर भी वह उन्हें आफ़ियत और रिज़्क़ अता करता है।" (तफ़हीमुल मुस्लिम)
आपका मकाम और अल्लाह की मर्जी
लेख

आपका मकाम और अल्लाह की मर्जी

किसी बुजुर्ग ने क्या ही खूब फरमाया है: अगर तुम यह जानना चाहते हो कि अल्लाह के नजदीक तुम्हारा मकाम क्या है, तो देखो वह तुम्हें किस काम में व्यस्त (मशगूल) रखता है: अगर वह तुम्हें अपने ज़िक्र में व्यस्त रखे, तो जान लो कि वह तुम्हें याद रखना चाहता है। अगर तुम्हें कुरान में व्यस्त करे, तो सम...

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