عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ، قَالَ : قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : إِذَا ضُيِّعَتِ الْأَمَانَةُ ، فَانْتَظِرِ السَّاعَةَ، قَالَ : كَيْفَ إِضَاعَتُهَا يَا رَسُولَ اللَّهِ ؟ قَالَ : إِذَا أُسْنِدَ الْأَمْرُ إِلَى غَيْرِ أَهْلِهِ فَانْتَظِرِ السَّاعَةَ(بُخاری شریف: ۶۴۹۶)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु ने बयान किया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जब अमानत ज़ाया की जाने लगे तो क़यामत का इंतज़ार करो।" उसने अर्ज़ किया, "अमानत ज़ाया करने की क्या सूरत होगी या रसूलुल्लाह?" आनहुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जब काम ना-अहलों के सुपुर्द किए जाने लगें तो क़यामत का इंतज़ार करो।" (नस्रुल बारी)