हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ، قَالَ : قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : إِذَا ضُيِّعَتِ الْأَمَانَةُ ، فَانْتَظِرِ السَّاعَةَ، قَالَ : كَيْفَ إِضَاعَتُهَا يَا رَسُولَ اللَّهِ ؟ قَالَ : إِذَا أُسْنِدَ الْأَمْرُ إِلَى غَيْرِ أَهْلِهِ فَانْتَظِرِ السَّاعَةَ(بُخاری شریف: ۶۴۹۶)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु ने बयान किया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जब अमानत ज़ाया की जाने लगे तो क़यामत का इंतज़ार करो।" उसने अर्ज़ किया, "अमानत ज़ाया करने की क्या सूरत होगी या रसूलुल्लाह?" आनहुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जब काम ना-अहलों के सुपुर्द किए जाने लगें तो क़यामत का इंतज़ार करो।" (नस्रुल बारी)
आपका मकाम और अल्लाह की मर्जी
लेख

आपका मकाम और अल्लाह की मर्जी

किसी बुजुर्ग ने क्या ही खूब फरमाया है: अगर तुम यह जानना चाहते हो कि अल्लाह के नजदीक तुम्हारा मकाम क्या है, तो देखो वह तुम्हें किस काम में व्यस्त (मशगूल) रखता है: अगर वह तुम्हें अपने ज़िक्र में व्यस्त रखे, तो जान लो कि वह तुम्हें याद रखना चाहता है। अगर तुम्हें कुरान में व्यस्त करे, तो सम...

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