हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ‏‏‏‏‏‏أَنّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا شَرِبَ تَنَفَّسَ ثَلَاثًا ‏‏‏‏‏‏وَقَالَ :‏‏‏‏ هُوَ أَهْنَأُ وَأَمْرَأُ وَأَبْرَأُ (ابو داؤد شریف:۳۷۲۷/کتاب الاشربه)
अनुवाद
हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरवी है कि आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तीन साँस में पानी नोश फ़रमाते थे। और आप फ़रमाते कि "यह साँस लेना प्यास को अच्छी तरह बुझाता है और खाने को हज़म करता है और तंदुरुस्ती बेहतर बनाता है।" (सुनन अबू दाऊद मुतरजिम/जिल्द:३/सफ़्हा:१४३)
एक वकील का इब्रतनाक़ (शर्मनाक) अंजाम
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एक वकील का इब्रतनाक़ (शर्मनाक) अंजाम

एक वकील साहब अदालतों में लोगों की पहली पसंद (ترجیح) होते थे। फीस लाखों में थी... बड़े-बड़े अपराधियों (मुजरिमों) को बरी करवा लिया करते थे... आइए! अब उनका इब्रतनाक़ (عبرتناک - शिक्षाप्रद/शर्मनाक) अंजाम पढ़िए... फिर वक़्त बदलता है, उनकी उम्र ढल जाती है और वह बूढ़े हो जाते हैं। आँखों की रोशनी (بینائی)...

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