عَنْ جَرِيرٍ، قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، يَقُولُ: مَا مِنْ رَجُلٍ يَكُونُ فِي قَوْمٍ يُعْمَلُ فِيهِمْ بِالْمَعَاصِي يَقْدِرُونَ عَلَى أَنْ يُغَيِّرُوا عَلَيْهِ فَلَا يُغَيِّرُوا إِلَّا أَصَابَهُمُ اللَّهُ بِعَذَابٍ مِنْ قَبْلِ أَنْ يَمُوتُوا(ابو داؤد شریف:۴۳۳۹/کتاب الملاحم)
अनुवाद
हज़रत जरीर (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि मैंने हज़रत रसूल करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुना। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फ़रमाते थे: "किसी क़ौम में जो शख़्स बुरे काम का मुर्तकिब हो और क़ौम के लोग क़ुदरत के बावुजूद उस शख़्स और उसके काम को तब्दील न करें तो अल्लाह तआला उन लोगों पर अपना अज़ाब उन लोगों की मौत आने से पहले ही पहुँचा देता है।" (अबू दाऊद शरीफ़ मुतरजिम/जिल्द:३/सफ़्हा:३७६)