हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: "अल्लाह तआला तुम्हारी सूरतों और तुम्हारे अमवाल को नहीं देखता लेकिन वह अल्लाह तआला तुम्हारे दिलों और आमाल को देखता है।" (तफ़हीम-उल-मुस्लिम)
हज़ूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पर अरबी भाषा में निम्नलिखित पुस्तकों से लाभ उठाया जा सकता है:
1: अस-सीरत अन-नबविय्याह: दो खंडों (जिल्दों) में चार भागों पर आधारित यह अब्दुल मलिक बिन हिशाम अल-हिमयरी (मृत्यु: 833 हिजरी) की है, जो इब्न इसहाक़ की 'अल-मग़ाज़ी व अस-सियर' के क्रम (तरतीब) से लिखी गई है।...