حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَزَالُ جَهَنَّمُ تَقُولُ هَلْ مِنْ مَزِيدٍ حَتَّى يَضَعَ فِيهَا رَبُّ الْعِزَّةِ تَبَارَكَ وَتَعَالَى قَدَمَهُ فَتَقُولُ قَطْ قَطْ وَعِزَّتِكَ وَيُزْوَى بَعْضُهَا إِلَى بَعْضٍ(مسلم شریف:٢٨٤٨)
अनुवाद
हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) बयान फ़रमाते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: "दोज़ख़ लगातार यही कहती रहेगी: 'हल मिन मज़ीद' यानी क्या कुछ और भी है? यहाँ तक कि जब अल्लाह तआला (अपनी शायान-ए-शान) उसमें अपना क़दम रखेगा तो फिर दोज़ख़ कहेगी: 'तेरी इज़्ज़त की क़सम! बस, बस।' और उसका एक हिस्सा सिमटकर दूसरे हिस्से से मिल जाएगा।" (तफ़हीम-उल-मुस्लिम/जिल्द:३/सफ़्हा:१०८४)