حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ إِسْحَقُ أَخْبَرَنَا و قَالَ عُثْمَانُ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ عَرْشَ إِبْلِيسَ عَلَى الْبَحْرِ فَيَبْعَثُ سَرَايَاهُ فَيَفْتِنُونَ النَّاسَ فَأَعْظَمُهُمْ عِنْدَهُ أَعْظَمُهُمْ فِتْنَةً(مسلم شریف:۲۸۱۳)
अनुवाद
हज़रत जाबिर (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) से मरवी है कि मैंने नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुना: "इबलीस का तख़्त समुंदर पर होता है। पस वह अपने लश्करों को भेजता है ताकि वह लोगों को फ़ितने में डालें। पस उन लश्कर वालों में से उसके नज़दीक बड़े मक़ाम वाला वही होता है जो उनमें सबसे ज़्यादा फ़ितना डालने वाला हो।" (तफ़हीम-उल-मुस्लिम)