हदीस अल-रसूल ﷺ

أَنَّهُ سَمِعَ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ، ‏‏‏‏‏‏يَقُولُ:‏‏‏‏ إِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخَذَ حَرِيرًا فَجَعَلَهُ فِي يَمِينِهِ، ‏‏‏‏‏‏وَأَخَذَ ذَهَبًا، ‏‏‏‏‏‏فَجَعَلَهُ فِي شِمَالِهِ، ‏‏‏‏‏‏ثُمَّ قَالَ:‏‏‏‏ إِنَّ هَذَيْنِ حَرَامٌ عَلَى ذُكُورِ أُمَّتِي .(ابو داؤد:۴۰۵۷)
अनुवाद
हज़रत अली (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) से रिवायत है कि आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने एक रेशमी कपड़ा लेकर अपने दाएँ हाथ में रखा और अपने बाएँ हाथ में सोना रखा और इरशाद फ़रमाया: "यह दोनों अशिया मेरी उम्मत के मर्दों के लिए हराम हैं।" (अबू दाऊद शरीफ़ - मुतरजिम)
ये हालात बदलते क्यों नहीं?
लेख

ये हालात बदलते क्यों नहीं?

मुही-उस-सुन्नत हज़रत शाह अबरार-उल-हक़ से कुछ लोगों ने शिकायत की कि मुसलमानों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं, खानक़ाहों और मदरसों में दुआओं का खूब प्रबंध हो रहा है, अल्लाह वाले लगातार अल्लाह के हुज़ूर दुआएं कर रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं और हालात बद से बदतर...

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