हज़रत इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने बयान किया कि नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मस्नूई बाल जोड़ने वाली और जुड़वाने वाली और गोदने वाली और गुदवाने वाली पर लानत फ़रमाई है। (नस्र-उल-बारी)
समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़माने में पांच मर्तबा अज़ान देकर खुलेआम नमाज़ें पढ़ता था। यह सुनकर इस आजिज़ को हैरत हुई और पूछा: "वह कैसे?" उस नौजवान ने अपन...