हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ : إِنَّ الصِّدْقَ يَهْدِي إِلَى الْبِرِّ وَإِنَّ الْبِرَّ يَهْدِي إِلَى الْجَنَّةِ ، وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَصْدُقُ حَتَّى يَكُونَ صِدِّيقًا ، وَإِنَّ الْكَذِبَ يَهْدِي إِلَى الْفُجُورِ وَإِنَّ الْفُجُورَ يَهْدِي إِلَى النَّارِ ، وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَكْذِبُ حَتَّى يُكْتَبَ عِنْدَ اللَّهِ كَذَّابًا(بُخاری شریف:۶۰۹۴)
अनुवाद
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी अकरम (ﷺ) ने फ़रमाया सच नेकी की तरफ़ ले जाता है और नेकी जन्नत तक ले जाती है और एक शख़्स सच बोलता रहता है यहाँ तक कि वह सिद्दीक़ (बहुत सच्चा) हो जाता है और बिला शुबा झूठ बुराई की तरफ़ ले जाता है और बुराई जहन्नम तक ले जाती है और एक शख़्स झूठ बोलता रहता है यहाँ तक कि अल्लाह के यहाँ कज़्ज़ाब (बहुत झूठा) लिख दिया जाता है। (नस्रुल बारी)
मेरे आदरणीय पिता का घरेलू और पारिवारिक जीवन
लेख

मेरे आदरणीय पिता का घरेलू और पारिवारिक जीवन

लेखक: मौलाना मोहम्मद सईद पालनपुरी शिक्षक: जामिया अल-इमाम मोहम्मद अनवर शाह कश्मीरी, देवबंद मेरे आदरणीय पिता हज़रत मौलाना मुफ़्ती सईद अहमद साहब पालनपुरी, पूर्व शेख-उल-हदीस और सदरुल मुदर्रिसीन (प्रधान शिक्षक) दारुल उलूम देवबंद की वफ़ात (देहांत) के बाद से इस लेख को लिखने के समय तक लेख लिखने का सिल...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार