عَنْ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ : إِنَّ الصِّدْقَ يَهْدِي إِلَى الْبِرِّ وَإِنَّ الْبِرَّ يَهْدِي إِلَى الْجَنَّةِ ، وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَصْدُقُ حَتَّى يَكُونَ صِدِّيقًا ، وَإِنَّ الْكَذِبَ يَهْدِي إِلَى الْفُجُورِ وَإِنَّ الْفُجُورَ يَهْدِي إِلَى النَّارِ ، وَإِنَّ الرَّجُلَ لَيَكْذِبُ حَتَّى يُكْتَبَ عِنْدَ اللَّهِ كَذَّابًا(بُخاری شریف:۶۰۹۴)
अनुवाद
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी अकरम (ﷺ) ने फ़रमाया सच नेकी की तरफ़ ले जाता है और नेकी जन्नत तक ले जाती है और एक शख़्स सच बोलता रहता है यहाँ तक कि वह सिद्दीक़ (बहुत सच्चा) हो जाता है और बिला शुबा झूठ बुराई की तरफ़ ले जाता है और बुराई जहन्नम तक ले जाती है और एक शख़्स झूठ बोलता रहता है यहाँ तक कि अल्लाह के यहाँ कज़्ज़ाब (बहुत झूठा) लिख दिया जाता है। (नस्रुल बारी)