हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ: قُبِضَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ ابْنُ ثَلَاثٍ وَسِتِّينَ، وَأَبُو بَكْرٍ وَهُوَ ابْنُ ثَلَاثٍ وَسِتِّينَ، وَعُمَرُ وَهُوَ ابْنُ ثَلَاثٍ وَسِتِّينَ(مسلم شریف: ۲۳۴۸)
अनुवाद
हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि नबी (ﷺ) का इंतिक़ाल हुआ तो आप तिरसठ बरस के थे, अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.) का इंतिक़ाल भी तिरसठ बरस की उम्र में हुआ और उमर (रज़ि.) का इंतिक़ाल भी तिरसठ बरस ही की उम्र में हुआ। (तफ़हीमुल मुस्लिम)
कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)
लेख

कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)

एक पिता ने अपने जीवन के आखिरी वक्त में अपने बेटे को पास बुलाया, उसे एक पुरानी कलाई घड़ी सौंपी और कहा: "मेरे बेटे, यह घड़ी दो सौ साल से भी ज़्यादा पुरानी है। यह तुम्हारे परदादा की है। इसे तुम्हें सौंपने से पहले, मैं चाहता हूँ कि तुम इसे गली के मोड़ पर मौजूद घड़ीसाज़ (घड़ी ठीक करने वाले) के पास ले जाओ...

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