عَنِ الزُّبَيْرِ بْنِ عَدِي رَضِيَ اللهُ تَعَالَى عَنْهُ قَالَ: أَتَيْنَا أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَشَكَوْنَا إِلَيْهِ مَا نَلْقَى مِنَ الحَجَّاجِ فَقَالَ: "اِصْبِرُوا فَإِنَّهُ لَا يَاْتِي زَمَانٌ إِلَّا وَالَّذِي بَعْدَهُ شَرٌّ مِنْهُ حَتَّى تَلْقَوْا رَبَّكُمْ سَمِعْتُهُ مِنْ نَّبِيِّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ. (رواه البخاري)
अनुवाद
हज़रत ज़ुबैर बिन अदी (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) बयान करते हैं: "हम हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) के पास आए, हमने उनके पास हज्जाज के मज़ालिम का शिकवा किया। हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) ने कहा: 'सब्र से काम लो, इसलिए कि जो वक़्त आ रहा है, उससे पीछे आने वाला वक़्त पहले से ज़्यादा ख़राब होगा, यहाँ तक कि तुम अपने रब से जा मिलोगे। मैंने यह बात तुम्हारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुनी है।'" (रौज़त-उस-सालिहीन जिल्द:१ सफ़्हा:२८९)