हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنِ الزُّبَيْرِ بْنِ عَدِي رَضِيَ اللهُ تَعَالَى عَنْهُ قَالَ: أَتَيْنَا أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَشَكَوْنَا إِلَيْهِ مَا نَلْقَى مِنَ الحَجَّاجِ فَقَالَ: "اِصْبِرُوا فَإِنَّهُ لَا يَاْتِي زَمَانٌ إِلَّا وَالَّذِي بَعْدَهُ شَرٌّ مِنْهُ حَتَّى تَلْقَوْا رَبَّكُمْ سَمِعْتُهُ مِنْ نَّبِيِّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ. (رواه البخاري)
अनुवाद
हज़रत ज़ुबैर बिन अदी (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) बयान करते हैं: "हम हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) के पास आए, हमने उनके पास हज्जाज के मज़ालिम का शिकवा किया। हज़रत अनस (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) ने कहा: 'सब्र से काम लो, इसलिए कि जो वक़्त आ रहा है, उससे पीछे आने वाला वक़्त पहले से ज़्यादा ख़राब होगा, यहाँ तक कि तुम अपने रब से जा मिलोगे। मैंने यह बात तुम्हारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुनी है।'" (रौज़त-उस-सालिहीन जिल्द:१ सफ़्हा:२८९)
सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख
लेख

सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख

लेखक: मुहद्दिस-ए-अस्र अल्लामा सैयद मुहम्मद यूसुफ बनूरी (रहमतुल्लाह अलैह) बात तो बिल्कुल साफ है कि सहाबा (पैगंबर के साथी) जैसे भी हों, मगर वे तुम से तो अच्छे ही होंगे। तुम हवा में उड़ लो, आसमान पर पहुँच जाओ, सौ बार मर कर जी लो, मगर तुम से सहाबी तो नहीं बना जा सकेगा। तुम आखिर वह आँख कहाँ से लाओगे ज...

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