मुहक्कक मसाला

मस्जिद में जगह रोकना कैसा है?

मस्जिद में किसी शख़्स का अपना रुमाल, टोपी या मुसल्ला (जानमाज़) रखकर जगह रोक लेना मकरूह है, और वह शख़्स इस सूरत में उस जगह का हक़दार नहीं होगा, बल्कि मस्जिद में पहले पहुँच कर जो शख़्स जिस जगह बैठ जाए वही उसका हक़दार है। हाँ, अगर कोई शख़्स मस्जिद में किसी जगह कुछ देर इबादत करे, फिर किसी ज़रूरत से थोड़ी देर के लिए जाना चाहे और रुमाल वग़ैरह रखकर जगह रोक ले, तो यह जायज़ है और वह उस जगह का हक़दार होगा। (अहम मसाइल/जि:२/पृ:१८७)

जिंदगी का सारांश – मुफ्ती मोहम्मद तकी उस्मानी के 20 सुनहरे सिद्धांत
लेख

जिंदगी का सारांश – मुफ्ती मोहम्मद तकी उस्मानी के 20 सुनहरे सिद्धांत

मोहतरम शैख-उल-इस्लाम मुफ्ती मोहम्मद तकी उस्मानी साहब से सवाल किया गया कि, "हज़रत, जिंदगी का सारांश (خلاصہ) क्या है?" हज़रत ने ये 20 नुक्ते (निकात) इर्शाद फरमाए: (1) हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा किया करो। (2) कोशिश करो कि पूरी जिंदगी में कोई तुम्हारी शिकायत किसी दूसरे इंसान से न करे; परवरदिगार...

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