मग़रिब और वित्र में क़स्र नहीं
कुछ लोग सफ़र-ए-शरई (जिसकी दूरी तक़रीबन साढ़े सतहत्तर किलोमीटर है) पर निकलते हैं, तो यह समझते हैं कि मग़रिब और वित्र में भी क़स्र है, यानी इनकी भी दो रकअत ही पढ़ी जाए, हालाँकि ऐसा नहीं है, मग़रिब और वित्र की नमाज़ सफ़र के दौरान तीन-तीन रकअत ही हैं, इनमें कोई क़स्र नहीं। (अहम मसाइल/जि:७/पृ:७७)