मुहक्कक मसाला

मग़रिब और वित्र में क़स्र नहीं

कुछ लोग सफ़र-ए-शरई (जिसकी दूरी तक़रीबन साढ़े सतहत्तर किलोमीटर है) पर निकलते हैं, तो यह समझते हैं कि मग़रिब और वित्र में भी क़स्र है, यानी इनकी भी दो रकअत ही पढ़ी जाए, हालाँकि ऐसा नहीं है, मग़रिब और वित्र की नमाज़ सफ़र के दौरान तीन-तीन रकअत ही हैं, इनमें कोई क़स्र नहीं। (अहम मसाइल/जि:७/पृ:७७)

ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!
लेख

ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!

रवायत है कि सात सौ बरस पहले इस्फ़हान में एक मस्जिद बन रही थी। काम तक़रीबन ख़त्म हो चुका था और कारीगर छोटे-छोटे आख़िरी काम कर रहे थे। एक बूढ़ी औरत का वहाँ से गुज़र हुआ। वह अचानक खड़ी हो गई और मस्जिद के मीनार की जानिब इशारा करके कहने लगी कि यह मेरी नज़र में टेढ़ा नज़र आ रहा है। कारीगर हँसने लगे तो...

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