मुहक्कक मसाला

बात ख़त्म करते वक़्त या रुख़सत करते वक़्त ख़ुदा हाफ़िज़ कहना।

किसी शख़्स को रुख़सत करते वक़्त, या फ़ोन पर बात ख़त्म करते वक़्त ख़ुदा हाफ़िज़ कहना जाइज़ है, लेकिन मसनून और अफ़ज़ल तरीक़ा यह है कि "अस्सलामु अलैकुम" या "अस्तौदिउल्लाह-अ दीन-क" या जो दुआएँ आप (ﷺ) से मनक़ूल हैं वो पढ़ी जाएँ। (अहम मसाइल/जि:१/पृ:१३६)

आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी
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आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी

दफ़्तर के करीब फ़ुटपाथ पर बैठे उस बूढ़े से आते-जाते जूते पॉलिश करवाना उसका नियम था। मगर एक अजीब बात जो मैं पिछले कई दिनों से नोट कर रहा था, वह यह थी कि वह हर बार जूता पॉलिश करवाने के बाद उस बुजुर्ग से उलझता कि "पॉलिश ठीक नहीं की, इसलिए दोबारा करो।" और हैरानी की बात यह कि दोबारा पॉलिश करवाने का मुआवज...

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