बात ख़त्म करते वक़्त या रुख़सत करते वक़्त ख़ुदा हाफ़िज़ कहना।
किसी शख़्स को रुख़सत करते वक़्त, या फ़ोन पर बात ख़त्म करते वक़्त ख़ुदा हाफ़िज़ कहना जाइज़ है, लेकिन मसनून और अफ़ज़ल तरीक़ा यह है कि "अस्सलामु अलैकुम" या "अस्तौदिउल्लाह-अ दीन-क" या जो दुआएँ आप (ﷺ) से मनक़ूल हैं वो पढ़ी जाएँ। (अहम मसाइल/जि:१/पृ:१३६)