मुहक्कक मसाला

ग़ैर-मुस्लिम फ़ुक़रा (ग़रीबों) को ज़कात देना।

कुछ लोग ग़ैर-मुस्लिम फ़ुक़रा को ज़कात दे देते हैं और यह समझते हैं कि उनकी ज़कात अदा हो गई, जबकि इस सूरत में ज़कात अदा नहीं हुई, क्योंकि ज़कात का मसरफ़ (हक़दार) सिर्फ़ मुसलमान फ़ुक़रा हैं, इसलिए उन पर दोबारा उतनी ही ज़कात मुसलमान ग़रीबों को देना लाज़िम है। (अहम मसाइल/जि:३/पृ:१३५)

क़ुरआन का मोजिज़ा और एक अमेरिकी डॉक्टर का क़बूल-ए-इस्लाम
लेख

क़ुरआन का मोजिज़ा और एक अमेरिकी डॉक्टर का क़बूल-ए-इस्लाम

इस्लाम स्वीकार करने की यह घटना आश्चर्यजनक भी है और शिक्षाप्रद भी। आश्चर्यजनक इस दृष्टिकोण से कि क़ुरआन के अवतरण (نزول) को लगभग डेढ़ हज़ार साल का समय बीत जाने के बाद भी आज तक इस बिंदु पर किसी की नज़र नहीं जा सकी, जो एक अमेरिकी डॉक्टर के इस्लाम स्वीकार करने का कारण बनी। और शिक्षाप्रद इस पहलू से है कि अल्ल...