रोज़े की हालत में लिफ़ाफ़े की गोंद ज़बान से चाटना।
रोज़े की हालत में लिफ़ाफ़े की गोंद को अपनी ज़बान से तर (गीला) करना मकरूह है, क्योंकि गोंद में ज़ायक़ा (स्वाद) होता है, और रोज़े की हालत में किसी भी चीज़ के ज़ायक़े को चखना मकरूह है; अलबत्ता अगर उंगली में थूक लेकर उससे गोंद को तर करे तो कोई हरज नहीं है। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:९४)