मुहक्कक मसाला

रोज़े की हालत में लिफ़ाफ़े की गोंद ज़बान से चाटना।

रोज़े की हालत में लिफ़ाफ़े की गोंद को अपनी ज़बान से तर (गीला) करना मकरूह है, क्योंकि गोंद में ज़ायक़ा (स्वाद) होता है, और रोज़े की हालत में किसी भी चीज़ के ज़ायक़े को चखना मकरूह है; अलबत्ता अगर उंगली में थूक लेकर उससे गोंद को तर करे तो कोई हरज नहीं है। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:९४)

ये हालात बदलते क्यों नहीं?
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ये हालात बदलते क्यों नहीं?

मुही-उस-सुन्नत हज़रत शाह अबरार-उल-हक़ से कुछ लोगों ने शिकायत की कि मुसलमानों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं, खानक़ाहों और मदरसों में दुआओं का खूब प्रबंध हो रहा है, अल्लाह वाले लगातार अल्लाह के हुज़ूर दुआएं कर रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं और हालात बद से बदतर...

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