मुहक्कक मसाला

रोज़ेदार का कान में तेल या दवा डालना।

रोज़े की हालत में कान में दवा या तेल डालने से रोज़ा फ़ासिद हो जाता है, क्योंकि फ़ुक़हा-ए-मुतक़द्दिमीन (प्राचीन फ़क़ीहों) के क़ौल (कथन) के मुताबिक़ कान में डाली हुई चीज़ के लिए दिमाग़ तक पहुँचने के लिए गुज़रगाह (रास्ता) मौजूद है, मगर जदीद साइंसी तहक़ीक़ (आधुनिक वैज्ञानिक शोध) से यह बात साबित है कि कान और दिमाग़ के बीच कोई गुज़रगाह नहीं है, अगर ऐसा ही है तो कान में दवा डालने से रोज़ा फ़ासिद नहीं होगा, इसलिए बेहतर यही है कि बहालत-ए-रोज़ा (रोज़े की हालत में) कान में दवा डालने से एहतियात बरती जाए। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:९६)

दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी
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दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी

शागिर्द (छात्र) ग़ौर से सुन रहा था। उस्ताद (शिक्षक) ने पूछा, "अगर मैं तुम्हें एक सेब, और एक सेब, और एक सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कितने सेब हो जाएंगे?" शागिर्द ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, "4।" उस्ताद को लगा कि शायद शागिर्द सवाल ठीक से समझ नहीं पाया। उस्ताद ने इत्मीनान से दोबारा पूछा... "देखो...

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