रोज़ेदार का नाक में दवा डालना।
रोज़े की हालत में नाक में दवा डालने से रोज़ा फ़ासिद हो जाता है, क्योंकि नाक में किसी शय (चीज़) के मैदे (पेट) तक पहुँचने की गुज़रगाह (रास्ता) मौजूद है, इसी वजह से बहालत-ए-रोज़ा इस्तिनशाक़ (नाक में पानी चढ़ाने) में मुबालग़ा करने से मना किया गया है, लिहाज़ा रोज़े की हालत में नाक में दवा डालने से परहेज़ किया जाए। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:९५)