साँस के मरीज़ रोज़ेदार का पंप के ज़रीये मुँह में हवा लेना।
रोज़े की हालत में साँस के मरीज़ का पंप के ज़रीये मुँह में हवा लेने से रोज़ा फ़ासिद हो जाएगा (टूट जाएगा), क्योंकि आजकल जो पंप इस्तेमाल होता है, उसमें दवा के अज्ज़ा (तत्व/अंश) होते हैं, और इन अज्ज़ा का मेअदा (पेट) में पहुँचना यक़ीनी होता है; अलबत्ता अगर पंप में किसी क़िस्म की दवा न डाली जाए, तो महज़ (केवल) पंप के ज़रीये हवा लेने से रोज़ा फ़ासिद नहीं होगा। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:९४)