ग़ुस्ल के वक़्त कलमा पढ़ना ज़रूरी नहीं।
कुछ लोग यह कहते हैं कि ग़ुस्ल करते वक़्त कलमा पढ़ना ज़रूरी है, वरना नापाकी दूर नहीं होती। इसी तरह कुछ लोग मुर्दे को नहलाते वक़्त कलमा पढ़ने को ज़रूरी ख़याल करते हैं; शरअन (शरीयत के अनुसार) ये दोनों बातें साबित नहीं हैं, बल्कि ग़ुस्ल करते वक़्त कलमा या और कोई ज़िक्र करने को मना क़रार दिया गया है। (अहम मसाइल/जि:८/पृ:७७)