इआदा (दोहराई जाने वाली) नमाज़ में अज़ान और इक़ामत।
अगर किसी नमाज़ का किसी फ़साद (ख़राबी/टूटने) की वजह से, वक़्त ही के अंदर, इआदा किया जा रहा हो (दोहराई जा रही हो), तो यह इआदा बिना अज़ान और इक़ामत ही होगा, अज़ान और इक़ामत की ज़रूरत नहीं है। (अहम मसाइल/जि:९/पृ:८५)