मुहक्कक मसाला

इआदा (दोहराई जाने वाली) नमाज़ में अज़ान और इक़ामत।

अगर किसी नमाज़ का किसी फ़साद (ख़राबी/टूटने) की वजह से, वक़्त ही के अंदर, इआदा किया जा रहा हो (दोहराई जा रही हो), तो यह इआदा बिना अज़ान और इक़ामत ही होगा, अज़ान और इक़ामत की ज़रूरत नहीं है। (अहम मसाइल/जि:९/पृ:८५)

असली सख़ावत (उदारता) कहाँ होनी चाहिए?
लेख

असली सख़ावत (उदारता) कहाँ होनी चाहिए?

एक महिला ने एक बुजुर्ग ठेले वाले से पूछा: "अंडे कितने रुपये दर्जन हैं?" बूढ़े ने अदब से जवाब दिया: "बीबी, तीस रुपये का एक अंडा।" महिला बोली: "मैं छह अंडे 150 रुपये में लूँगी, वरना मैं जा रही हूँ।" बूढ़ा आदमी नरमी से मुस्कुराया: "बीबी, जैसे आपकी मर्ज़ी वैसे ही ले लें। मेरे लिए तो यह एक अच्छी शुरुआत ह...

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