मुसाफ़िर को सफ़र में इफ़्तार (रोज़ा न रखने) की रुख़सत।
रमज़ान शरीफ़ के अंदर सफ़र की हालत में इस नीयत से रोज़ा क़ज़ा कर देना कि रमज़ान के बाद क़ज़ा का रोज़ा रख लिया जाएगा तो यह जाइज़ है, बशर्ते कि सफ़र, सफ़र-ए-शरई की मुसाफ़त (दूरी) पर हो, लेकिन अगर ज़्यादा मुशक़्क़त न हो तो रोज़ा रखना ही अफ़ज़ल है। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३३७)