मुहक्कक मसाला

जो शख़्स ख़ुद रोज़ा न रखे उसकी दावत-ए-इफ़्तार का हुक्म।

जो शख़्स बिना किसी उज़्र-ए-शरई (धार्मिक मजबूरी/वैध कारण) के रमज़ान-उल-मुबारक का रोज़ा छोड़ता हो और ख़िलाफ़-ए-सुन्नत (सुन्नत के विरुद्ध) तरीक़े पर दावत-ए-इफ़्तार करता हो, तो ऐसे शख़्स की दावत-ए-इफ़्तार में शिरकत नहीं करनी चाहिए (शामिल नहीं होना चाहिए)। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३४८)

कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)
लेख

कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)

एक पिता ने अपने जीवन के आखिरी वक्त में अपने बेटे को पास बुलाया, उसे एक पुरानी कलाई घड़ी सौंपी और कहा: "मेरे बेटे, यह घड़ी दो सौ साल से भी ज़्यादा पुरानी है। यह तुम्हारे परदादा की है। इसे तुम्हें सौंपने से पहले, मैं चाहता हूँ कि तुम इसे गली के मोड़ पर मौजूद घड़ीसाज़ (घड़ी ठीक करने वाले) के पास ले जाओ...

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