ग़ैर-मुस्लिम की दावत-ए-इफ़्तार का हुक्म।
जिन पाक और हलाल चीज़ों का खाना हलाल और जाइज़ है, उन तमाम चीज़ों से रोज़ा इफ़्तार करना भी जाइज़ है; लिहाज़ा अगर कोई ग़ैर-मुस्लिम पाक और हलाल चीज़ से इफ़्तार कराए, तो उससे इफ़्तार करना फ़ी-नफ़्सिही (मूल रूप से) जाइज़ और दुरुस्त है। ताहम (हालाँकि) आजकल ज़्यादातर ऐसे प्रोग्राम सियासी मक़ासिद (राजनीतिक उद्देश्यों) के लिए किए जाते हैं, इसलिए इनमें शिरकत (शामिल होने) से एहतियात करनी चाहिए। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३४९)