मुहक्कक मसाला

ग़ैर-मुस्लिम की दावत-ए-इफ़्तार का हुक्म।

जिन पाक और हलाल चीज़ों का खाना हलाल और जाइज़ है, उन तमाम चीज़ों से रोज़ा इफ़्तार करना भी जाइज़ है; लिहाज़ा अगर कोई ग़ैर-मुस्लिम पाक और हलाल चीज़ से इफ़्तार कराए, तो उससे इफ़्तार करना फ़ी-नफ़्सिही (मूल रूप से) जाइज़ और दुरुस्त है। ताहम (हालाँकि) आजकल ज़्यादातर ऐसे प्रोग्राम सियासी मक़ासिद (राजनीतिक उद्देश्यों) के लिए किए जाते हैं, इसलिए इनमें शिरकत (शामिल होने) से एहतियात करनी चाहिए। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३४९)

हज़रत बिलाल — आशिक-ए-रसूल ﷺ
लेख

हज़रत बिलाल — आशिक-ए-रसूल ﷺ

हज़रत बिलाल (रज़ि.) से एक बार किसी ने पूछा कि "आपने पहली बार हुज़ूर नबी करीम ﷺ को कैसे देखा?" हज़रत बिलाल (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि "मैं मक्के के लोगों को बहुत ही कम जानता था। क्योंकि मैं एक ग़ुलाम था और अरब में ग़ुलामों के साथ अमानवीय (ज़ुल्म भरा) सुलूक आम था। उनकी हैसियत से बढ़कर उनसे काम लिया जाता थ...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार