मुहक्कक मसाला

ग्लूकोज़ चढ़ाना।

रोज़े की हालत में ग्लूकोज़ चढ़वाना मुफ़्सिद-ए-सौम (रोज़ा तोड़ने वाला) नहीं है। इसलिए कि इसमें ग्लूकोज़ का पानी या दवा रगों (नसों) के ज़रीये बदन में जाती है, मनाफ़िज़-ए-अस्लीया (प्राकृतिक छिद्रों) के ज़रीये नहीं जाती और बराह-ए-रास्त (सीधे) जौफ़ (पेट/आंतरिक गुहा) में नहीं पहुँचती; ताहम (तथापि) बिना शदीद उज़्र (सख़्त मजबूरी) के रोज़े की हालत में ग्लूकोज़ नहीं चढ़वाना चाहिए; क्योंकि यह रोज़े की हिकमत के ख़िलाफ़ है। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३६८)

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)
लेख

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़माने में पांच मर्तबा अज़ान देकर खुलेआम नमाज़ें पढ़ता था। यह सुनकर इस आजिज़ को हैरत हुई और पूछा: "वह कैसे?" उस नौजवान ने अपन...

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