हालत-ए-जनाबत (नापाकी) में सहरी खाना।
ज़ैद इशा की नमाज़ पढ़कर सो गया, इत्तेफ़ाक़ से सहरी का वक़्त ख़त्म होने में सिर्फ़ 5-10 मिनट थे तो उसे एहतेलाम (स्वप्नदोष) हो गया, तो ऐसी सूरत में वह पहले सहरी खाए, उसके बाद ग़ुस्ल करके फ़ज्र की नमाज़ पढ़े; हालत-ए-जनाबत में सहरी खाने और रोज़े का वक़्त शुरू होने से रोज़े में फ़साद नहीं आता (रोज़ा ख़राब नहीं होता)। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३७२)