मुहक्कक मसाला

हालत-ए-जनाबत (नापाकी) में सहरी खाना।

ज़ैद इशा की नमाज़ पढ़कर सो गया, इत्तेफ़ाक़ से सहरी का वक़्त ख़त्म होने में सिर्फ़ 5-10 मिनट थे तो उसे एहतेलाम (स्वप्नदोष) हो गया, तो ऐसी सूरत में वह पहले सहरी खाए, उसके बाद ग़ुस्ल करके फ़ज्र की नमाज़ पढ़े; हालत-ए-जनाबत में सहरी खाने और रोज़े का वक़्त शुरू होने से रोज़े में फ़साद नहीं आता (रोज़ा ख़राब नहीं होता)। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३७२)

अहंकार का बुरा अंत
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अहंकार का बुरा अंत

यज़ीद बिन मलिक एक उमय्यद खलीफा थे, वह नए खलीफा थे जो उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ के बाद आए थे। एक दिन वह कहने लगे, "कौन कहता है कि बादशाहों को खुशियाँ नसीब नहीं होतीं...? मैं आज का दिन खुशी के साथ गुज़ार कर दिखाऊँगा, अब मैं देखता हूँ कि कौन मुझे रोकता है...?" उनसे कहा गया, "आजकल बगावत हो रही है, यह हो...

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