मुहक्कक मसाला

रोज़ा की हालत में लिवातत (समलैंगिकता) और मुश्त-ज़नी (हस्तमैथुन)।

लिवातत निहायत बदतरीन गुनाह और क़ाबिले लानत अमल है, बिल-ख़सूस रोज़ा के दौरान इस अमल का इर्तकाब शर्मनाक जुर्म है, इससे फ़ाइल और मफ़ऊल दोनों का रोज़ा टूट जाएगा, ख़्वाह इंजाल हो या न हो? अलबत्ता कफ़्फ़ारा लाज़िम नहीं है। इसी तरह मुश्त-ज़नी भी गुनाह है, जिसकी वजह से अगर इंजाल हो जाए तो रोज़ा टूट जाएगा और सिर्फ़ क़ज़ा लाज़िम होगी, कफ़्फ़ारा नहीं। (किताबुन नवाज़िल / जिल्द: 6 / सफ़हा: 379)

तलाक का कारण...??
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तलाक का कारण...??

कहते हैं एक अरबी व्यक्ति (اعرابی) ने अपनी बीवी को तलाक दे दी। कुछ लोग उसके पास पूछने और कारण मालूम करने आए कि उसने तलाक क्यों दी? वह कहने लगा: "वह अभी इद्दत (عدت) में है, अभी तक वह मेरी बीवी है और मुझे उससे रुजू (दोबारा रिश्ता जोड़ने) का हक हासिल है। अगर मैं उसके ऐब (कमियां) तुम्हारे सामने बयान कर द...

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