मुहक्कक मसाला

फ़िक्स्ड डिपॉज़िट रक़म पर ज़कात।

बैंक में फ़िक्स्ड डिपॉज़िट के तौर पर जमा करना 'दैने क़वी' (मज़बूत क़र्ज़) के दर्जे में है। जब तयशुदा मुद्दत गुज़रने पर पूरी रक़म मिलेगी, तो असल जमा की हुई रक़म पर हर साल की ज़कात वाजिब होगी। लेकिन जो रक़म बढ़ कर मिलेगी वह सूद (ब्याज़) है और क़तअन (पूरी तरह) हराम है, उस पर ज़कात वाजिब नहीं है। (किताबुन नवाज़िल / जिल्द: 6 / सफ़हा: 472)

सीरत-उन-नबी ﷺ पर उपयोगी पुस्तकें
लेख

सीरत-उन-नबी ﷺ पर उपयोगी पुस्तकें

हज़ूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पर अरबी भाषा में निम्नलिखित पुस्तकों से लाभ उठाया जा सकता है: 1: अस-सीरत अन-नबविय्याह: दो खंडों (जिल्दों) में चार भागों पर आधारित यह अब्दुल मलिक बिन हिशाम अल-हिमयरी (मृत्यु: 833 हिजरी) की है, जो इब्न इसहाक़ की 'अल-मग़ाज़ी व अस-सियर' के क्रम (तरतीब) से लिखी गई है।...

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