नाबालिग़ पर ज़कात वाजिब नहीं है, चाहे उसके पास कितना ही माल हो, और न ही उसके वालिदैन (माता-पिता) को उसके माल से ज़कात निकालने का इख़्तियार है। (किताबुन नवाज़िल / जिल्द: 6 / सफ़हा: 482)
एक महिला कहती हैं: एक दिन मैं अपने घर की सफ़ाई कर रही थी, इतने में मेरा बेटा आया और शीशे का एक नायाब तोहफा (शाहकार) गिरा दिया और वह टूट गया।
मैं उससे बहुत नाराज़ थी क्योंकि यह बहुत महंगा था, मेरी मां ने मुझे दिया था, मैं इसे पसंद करती थी और इसे संभालकर रखना चाहती थी।
मैंने गुस्से में उसे बुलाया और...