दूसरे गाँव वालों का नमाज़े जनाज़ा पढ़ कर मय्यत को दफ़न करना।
मय्यत पर नमाज़े जनाज़ा पढ़ना फ़र्ज़े किफ़ाया है, लिहाज़ा अगर मय्यत के पड़ोस और गाँव वाले मय्यत के कफ़न-दफ़न में शरीक न हो सकें और दूसरे गाँव के तीन, चार, पाँच, दस आदमियों ने मिलकर नमाज़े जनाज़ा पढ़ कर दफ़न कर दिया है तो यह दुरुस्त है, इसमें कोई क़बाहत नहीं है। (किताबुन नवाज़िल / जिल्द: 6 / सफ़हा: 126)