मुहक्कक मसाला

आख़िरी दीदार के लिए नमाज़े जनाज़ा के बाद मय्यत का मुँह देखना -

असल बात तो यह है कि चेहरा देखना कोई शरई हुक्म नहीं है कि इसके लिए बाक़ायदा एहतमाम किया जाए; ताहम अगर कोई चेहरा देखना चाहे तो नमाज़े जनाज़ा से क़ब्ल (पहले) दिखाने की इजाज़त है, नमाज़ के बाद न दिखाया जाए; क्योंकि इसमें दफ़न में ताख़ीर (देरी) लाज़िम आती है, और जहाँ यह रुनुमाई (चेहरा दिखाना) बाक़ायदा रस्म की सूरत इख़्तियार कर ले, वहाँ इस पर रोक-टोक करनी चाहिए। (किताबुन नवाज़िल / जिल्द: 6 / सफ़हा: 59)

इतिहास की सबसे शक्तिशाली माफ़ी (हज़रत अबू ज़र और हज़रत बिलाल का वाक़िया)
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इतिहास की सबसे शक्तिशाली माफ़ी (हज़रत अबू ज़र और हज़रत बिलाल का वाक़िया)

जब हज़रत अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने हज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को कहा... "ऐ काली-कलूटी माँ के बेटे! अब तू भी मेरी ग़लतियाँ निकालेगा...?" बिलाल यह सुनकर ग़ुस्से और अफ़सोस से बेक़रार होकर यह कहते हुए उठे, "ख़ुदा की क़सम! मैं इसे ज़रूर ब-ज़रूर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के...

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