मस्जिद की हुदूद (सीमाओं) में जमाअत के साथ नमाज़ हो जाने के बाद, बेहतर यही है कि तन्हा-तन्हा (अकेले-अकेले) नमाज़ पढ़ लें (दोबारा बा-जमाअत नमाज़ अदा न करें), यही ज़ाहिर-ए-रिवायत है। अगर अज़ान और इक़ामत के साथ जमाअत करके पढ़ें तो मकरूह-ए-तहरीमी है, और बिना अज़ान व इक़ामत जमाअत के साथ पढ़ना मकरूह-ए-तंज़ीही है। (अल-मब्सूत : 235/1) (किताब : दरसी व तालीमी अहम मसाइल / पृष्ठ: 97)