मुहक्कक मसाला

पड़ोसी के क्या-क्या हक़ (अधिकार) हैं?

एक पड़ोसी के दूसरे पड़ोसी पर बहुत से हक़ हैं। हदीस-ए-शरीफ़ में है कि अच्छा पड़ोसी नेक-बख़्ती (खुशकिस्मती) की निशानी है। पड़ोसी का हक़ यह है कि: (1) उसके साथ हुस्न-ए-सुलूक (अच्छा व्यवहार) किया जाए, (2) उसे तकलीफ़ न पहुँचाई जाए, (3) गाहे-बगाहे उसे हदिया (उपहार) भेजा जाए, (4) अगर वह हदिया दे तो उसे हक़ीर (तुच्छ) न समझें, बल्कि ख़ुश-दिली से क़बूल कर लें, (5) अपने पड़ोसी के लिए वही पसंद करें जो ख़ुद तुम अपने लिए पसंद करते हो, (8) पड़ोसियों की थोड़ी-बहुत ग़लतियों और तकलीफ़ों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए, वग़ैरह। (किताबुन नवाज़िल/खंड: 15/पृष्ठ: 184)

कारोबारी लाइन में मर्द-ओ-ज़न का इख़्तिलात
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कारोबारी लाइन में मर्द-ओ-ज़न का इख़्तिलात

मलफ़ूज़ात : हज़रत मौलाना मोहम्मद हकीम अख्तर साहब रहमतुल्लाह अलैह - व्यापारिक (کاروباری) लाइन में भी मर्द और औरत का इख़्तिलात (मेल-जोल) उरूज (चरम) पर है, देखिए! अव्वल (पहले) तो ऐसी रोज़ी तलाश करे जिसमें गुनाह का अंदेशा न हो, औरतों से साबक़ा (सामना) न हो, चाहे रोज़ी कम हो, पत्थर बांधकर भी अगर ख़ुद...

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