पत्नी को पति की अनुमति के बिना घर से बाहर कहीं नहीं जाना चाहिए; अलबत्ता पति के लिए यह उचित है कि वह रिवाज़ (प्रथा) और सुविधा के अनुसार समय-समय पर पत्नी को उसके माता-पिता से मिलने का अवसर दिया करे, चाहे मायके भेजकर या माता-पिता को अपने घर बुलाकर। इसी तरह पत्नी के क़रीबी रिश्तेदारों से कभी-कभार होने वाली मुलाक़ात में भी पति को रुकावट नहीं डालनी चाहिए; ताकि अच्छे व्यवहार (हुस्न-ए-मुआशरत) का प्रदर्शन हो और वैवाहिक जीवन आपसी विश्वास के साथ गुज़रे। (किताबुन नवाज़िल/खंड: 15/पृष्ठ: 157)