जनाबत की हालत में सोना?
अगर किसी व्यक्ति को जनाबत लाहक़ हो जाए (यानी वह नापाक हो जाए) तो बेहतर तो यह है कि वह ग़ुस्ल करके पवित्रता (तहारत) प्राप्त कर ले, हालाँकि अगर किसी उज़्र (कारण/मजबूरी) की वजह से उसी हालत में सोने का इरादा हो तो चाहिए कि शर्मगाह (गुप्तांग) को धोकर नमाज़ की तरह वज़ू करके सो जाए। (किताबुन नवाज़िल/खंड: 15/पृष्ठ: 287)