मुहक्कक मसाला

जनाज़े को चार आदमियों के द्वारा उठाकर मुनासिब (मध्यम) गति से चलना चाहिए और हर उठाने वाले को चालीस कदम लेकर चलना चाहिए। और मिट्टी देने के बाद सूरह बक़रह का आरंभ और अंत पढ़कर ईसाल-ए-सवाब करना हदीस से साबित है; इसलिए ईसाल-ए-सवाब करके आना ही बेहतर है, जल्दी हो तो उससे पहले भी आ सकते हैं। (किताबुन नवाज़िल/खंड: 6/पृष्ठ: 164)

वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)
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वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)

🖋 मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी - शम्अ-ए-फ़रोज़ां 🕯 अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक रास्ता बनाया है, इसी रास्ते से उस चीज़ को हासिल करने में इंसान की भलाई है और इस रास्ते को छोड़ देने में और अपनी तरफ़ से नए रास्ते बनाने में इंसान की बर्बादी है। अल्लाह तआला ने ग़िज़ा (भोजन) को पेट तक पहुँचान...

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