मुहक्कक मसाला

शादियों के मौसम में कुछ लोगों की यह आदत होती है कि जहां कहीं मंडप लगा हुआ है, खाना चल रहा है, तो बैठ गए, खाना खा लिया और चल दिए, जबकि उन्हें न तो खाने की दावत (निमंत्रण) होती है, और न ही इजाज़त (अनुमति)। इस तरह बिना दावत और बिना इजाज़त (स्पष्ट रूप से या संकेत से) किसी के यहां खाना खाना जायज़ नहीं है, और यह गैरत और आत्मसम्मान के भी खिलाफ है। हदीस पाक में है: "जो शख्स बिना दावत के खाने के लिए गया, वह चोर बनकर दाखिल हुआ, और लुटेरा बनकर वापस हुआ।" (मिशकात अल-मसाबीह: पृष्ठ/278, हदीस नंबर: 3222) (किताब: दरसी व तालीमी अहम मसाइल / पृष्ठ: 460)

अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन
लेख

अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन

शायर-ए-मशरिक़ (पूर्व के कवि) अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने सुन्नत-ए-रसूल (पैगंबर की परंपरा) के पालन को अपना शियोवा-ए-हयात (जीवन का तरीका) बना लिया था। "जौहर-ए-इक़बाल" में एक अजीब और बसीरत अफ़रोज़ (ज्ञानवर्धक) घटना का वर्णन किया गया है, जिससे अल्लामा इकबाल के जज़्बा-ए-शौक़ और इतात-ए-रसूल (रसूल के प्रति प्...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार