सहाबा किराम को "अलैहिस सलाम" कहना?
अलैहिस सलाम और सलातो-सलाम के कलमात हज़रात अंबिया और मलायका अलैहिमुस्सलाम के साथ ख़ास हैं; लिहाज़ा किसी ग़ैर-नबी के लिए असालतन् (स्वतंत्र रूप से) "अलैहिस सलाम" के कलमात इस्तेमाल करना मुनासिब नहीं है; अलबत्ता अगर अंबिया के साथ दीगर लोगों का भी ज़िक्र हो और तबाअन (उनके ताबे होकर) उनको भी सलाम में शामिल कर लिया जाए तो इसकी इजाज़त है। (किताब-उन-नवाज़िल/जि: 15/पृ: 97)