मुहक्कक मसाला

786 बिस्मिल्लाह के अदद (संख्या) हैं या हरे कृष्ण के?

बिस्मिल्लाह की जगह बेहतर तो यही है कि बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम या बि-इस्मिही सुब्हानहू तआला जैसे अल्फ़ाज़ लिखे जाएं; लेकिन अगर बे-हुरमती (अपमान) से बचाने के मक़सद से बिस्मिल्लाह के अदद 786 लिख दिए जाएं तो वह भी मम्नू (वर्जित/मना) नहीं है। और हरे कृष्ण के अदद 785 होते हैं, 786 नहीं। फ़क़त वल्लाहु तआला आलम (किताब-उन-नवाज़िल/जि: 15/पृ: 94)

मशहूर अरबी हिकायत: "सच के गवाह"
लेख

मशहूर अरबी हिकायत: "सच के गवाह"

कहते हैं एक बस्ती ऐसी थी जो झूठ बोलने और झूठी गवाही देने में मशहूर थी। उसी बस्ती में एक पुरुष और महिला ने गुप्त रूप से, लेकिन पूर्ण शरई तरीके से निकाह कर लिया। काज़ी, गवाह और शरई ज़रूरतें सब पूरी थीं। कुछ समय बाद दोनों में अनबन हो गई। पति ने पत्नी को घर से निकाल दिया और उसे तमाम शरई अधिकारों से भ...

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