786 बिस्मिल्लाह के अदद (संख्या) हैं या हरे कृष्ण के?
बिस्मिल्लाह की जगह बेहतर तो यही है कि बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम या बि-इस्मिही सुब्हानहू तआला जैसे अल्फ़ाज़ लिखे जाएं; लेकिन अगर बे-हुरमती (अपमान) से बचाने के मक़सद से बिस्मिल्लाह के अदद 786 लिख दिए जाएं तो वह भी मम्नू (वर्जित/मना) नहीं है। और हरे कृष्ण के अदद 785 होते हैं, 786 नहीं। फ़क़त वल्लाहु तआला आलम (किताब-उन-नवाज़िल/जि: 15/पृ: 94)