मुहक्कक मसाला

शरीअत के ऐतबार से जो हमारा जायज़ हक़ है, उसे देने में अगर कोई सरकारी कर्मचारी रुकावट बन रहा है, तो उसे रिश्वत देने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन अगर उससे जिस हक़ की मांग की जा रही है, वह शरीअत के ऐतबार से हमारा हक़ नहीं है, तो उसे रिश्वत देकर हासिल करना जायज़ नहीं है। (किताब: कारोबारी मसाइल और उनका शरई हल / पृष्ठ: 116)

इल्म-ए-नाफ़े (लाभकारी ज्ञान) की निशानियां
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इल्म-ए-नाफ़े (लाभकारी ज्ञान) की निशानियां

एक सवाल ज़हन में पैदा होता है कि इल्म-ए-नाफ़े (फ़ायदा पहुँचाने वाले ज्ञान) की अलामत (निशानी) क्या होती है? जी हाँ, नफ़ा (लाभ) देने वाला इल्म भी होता है। नबी अलैहिस्सलाम ने हमें दुआ सिखाई है: "ऐ अल्लाह! मैं पनाह माँगता हूँ ऐसे इल्म से जो नफ़ा न देता हो।" चुनाँचे इल्म-ए-नाफ़े की दो अलामतें (निशानियाँ)...

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