शरीअत के ऐतबार से जो हमारा जायज़ हक़ है, उसे देने में अगर कोई सरकारी कर्मचारी रुकावट बन रहा है, तो उसे रिश्वत देने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन अगर उससे जिस हक़ की मांग की जा रही है, वह शरीअत के ऐतबार से हमारा हक़ नहीं है, तो उसे रिश्वत देकर हासिल करना जायज़ नहीं है। (किताब: कारोबारी मसाइल और उनका शरई हल / पृष्ठ: 116)