मुहक्कक मसाला

बा जमाअत नमाज़ में बिल्कुल सीधे इस तरह मिल कर खड़े हों कि एक दूसरे के बाजू मिले हों, दरमियान (बीच) में कोई खाली जगह या फासला न रहे।

(1) अन नोमान बिन बशीर काल: कान रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम युसव्वी सुफूफना हत्ता कअन्नमा युसव्वी बिहल-क़िदाह - अल हदीस (सहीह मुस्लिम)

तर्जुमा: हज़रत नोमान बिन बशीर रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि रसूल-ए-ख़ुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमारी सफ़ों के सीधे करने में इस क़दर एहतिमाम फ़रमाते थे गोया इन सफ़ों से तीर सीधे किए जाएंगे। (मसाइल-ए-नमाज़ / पृ: 8)

बा-जमात नमाज़ की अहमियत और मुफ़्ती मुहम्मद शफ़ी साहब की आज्ञाकारिता
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बा-जमात नमाज़ की अहमियत और मुफ़्ती मुहम्मद शफ़ी साहब की आज्ञाकारिता

मुझे याद है कि देवबंद में जब मेरी उम्र तक़रीबन दस-बारह साल थी, एक दिन फज्र की नमाज़ के वक़्त सख़्त आंधी, मूसलाधार बारिश और गरज-चमक की बिना पर (वजह से) वालिद साहब (मुफ़्ती मुहम्मद शफ़ी साहब) मस्जिद तशरीफ़ न ले जा सके और नमाज़ घर में ही अदा फ़रमाई। उधर दादा अब्बा, जो मस्जिद के आशिक़ और नमाज़ बा-जमात क...

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