मुहक्कक मसाला

शोरबा (सूप) ज़्यादा करने की हिकमत?

जब गोश्त का शोरबा बनाया जाए तो गोश्त के असरात (प्रभाव) और ख़ासियतें शोरबे में मुंतक़िल हो जाती हैं। बिरना-बिना (इस वजह से) जिसे गोश्त की बोटी दस्तियाब न हो, तो उसे शोरबे के इस्तेमाल से गोश्त जैसे फ़वाइद हासिल होते हैं। इसी लिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शोरबा ज़्यादा करने की ताकीद फ़रमाई है। अलावे अज़ीं जब शोरबा ज़्यादा होगा तो वह खाना ज़्यादा लोगों के लिए काफ़ी हो जाएगा, और पास-पड़ोस में भी भेजना आसान होगा। (किताब: किताबुन नवाज़िल / जि: 16 / पृ: 100)

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या
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मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या

तीसरी सदी हिजरी में मिस्र में चार मुहद्दिसीन (हदीस के विद्वान) बहुत मशहूर हुए। चारों का नाम 'मोहम्मद' था, और चारों ही इल्म-ए-हदीस के जलील-उल-क़द्र (महान) अइम्मा (इमामों) में शुमार होते थे। उनमें से एक मोहम्मद बिन नस्र मर्वज़ी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं, दूसरे मोहम्मद बिन जरीर तबरी (रहमतुल्लाह अलैह), तीसर...

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