शोरबा (सूप) ज़्यादा करने की हिकमत?
जब गोश्त का शोरबा बनाया जाए तो गोश्त के असरात (प्रभाव) और ख़ासियतें शोरबे में मुंतक़िल हो जाती हैं। बिरना-बिना (इस वजह से) जिसे गोश्त की बोटी दस्तियाब न हो, तो उसे शोरबे के इस्तेमाल से गोश्त जैसे फ़वाइद हासिल होते हैं। इसी लिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शोरबा ज़्यादा करने की ताकीद फ़रमाई है। अलावे अज़ीं जब शोरबा ज़्यादा होगा तो वह खाना ज़्यादा लोगों के लिए काफ़ी हो जाएगा, और पास-पड़ोस में भी भेजना आसान होगा। (किताब: किताबुन नवाज़िल / जि: 16 / पृ: 100)